दक्षिण भारतीय राशि और नवांश चार्ट कैसे पढ़ें
बारह स्थिर खाने, लग्न कहाँ लिखा जाता है, और नवांश (D-9) क्या जोड़ता है।
राशि चार्ट (D-1) ही जन्म कुंडली है: जन्म के समय हर ग्रह बारह राशियों में से किसमें था, और पूर्वी क्षितिज पर कौन-सी राशि उदित हो रही थी — यानी लग्न।
दक्षिण भारतीय शैली
दक्षिण भारतीय शैली में राशियाँ अपनी जगह नहीं बदलतीं। बीच के खाली हिस्से के चारों ओर बारह खाने होते हैं; ऊपर बाएँ कोने में मीन से शुरू होकर घड़ी की दिशा में: ऊपर मेष, वृषभ, मिथुन; दाईं ओर नीचे कर्क, सिंह; नीचे कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु; और बाईं ओर ऊपर मकर, कुंभ। राशियाँ स्थिर हैं, इसलिए उत्तर भारतीय चार्ट की तरह लग्न हमेशा ऊपर नहीं होता; वह जिस खाने में है, वहीं “लग्न” लिखकर दिखाया जाता है।
ग्रह संक्षेप में लिखे जाते हैं — सू (सूर्य), चं (चंद्र), मं (मंगल), बु (बुध), गु (गुरु), शु (शुक्र), श (शनि), रा (राहु), के (केतु)। “(व)” का अर्थ है कि ग्रह वक्री था।
भाव
लग्न वाले खाने को पहला भाव मानकर, घड़ी की दिशा में अगला खाना दूसरा भाव है, और इसी तरह आगे। लग्न के ठीक सामने का सप्तम भाव विवाह और साझेदारी का भाव है।
नवांश चार्ट (D-9)
हर राशि 30° की है। इसे 3°20′ के नौ बराबर भागों में बाँटने पर नवांश बनता है। 108 नवांश 27 नक्षत्रों के एक-एक चरण के बराबर हैं। नवांश चार्ट में हर ग्रह को उस नवांश के अनुसार रखा जाता है जिसमें वह पड़ता है।
परंपरा से ज्योतिषी विवाह और जीवनसाथी के लिए नवांश देखते हैं, और किसी ग्रह की वास्तविक शक्ति जानने के लिए भी: दोनों चार्ट में एक ही राशि में स्थित ग्रह (वर्गोत्तम) विशेष रूप से बलवान माना जाता है।
लग्न लगभग 13 मिनट में एक नवांश पार कर लेता है, इसलिए नवांश लग्न जन्म समय पर बहुत निर्भर है — देखें सटीक जन्म समय क्यों ज़रूरी है।
यह केवल मार्गदर्शन के लिए है। निर्णय लेने से पहले ज्योतिषी से सलाह लें।