अयनांश क्या है, और कौन-सा चुनें?
भारतीय कुंडली पश्चिमी कुंडली से लगभग 24° अलग क्यों होती है, और लाहिड़ी व KP अयनांश में क्या अंतर है।
पश्चिमी ज्योतिष ग्रहों को उस बिंदु से मापता है जहाँ वसंत में सूर्य भूमध्य रेखा को पार करता है (सायन राशिचक्र)। भारतीय ज्योतिष उन्हें स्थिर तारों के सापेक्ष मापता है (निरयण राशिचक्र)। पृथ्वी की धुरी धीरे-धीरे डोलती है — इसे अयन चलन कहते हैं — इसलिए ये दोनों आरंभ बिंदु हर साल लगभग 50 विकला दूर खिसकते जाते हैं। इन दोनों के बीच का अंतर ही अयनांश है।
आज अयनांश 24° से थोड़ा अधिक है। इसीलिए पश्चिमी कुंडली में वृषभ 10° पर स्थित ग्रह भारतीय कुंडली में लगभग मेष 16° पर होता है, और पश्चिमी सूर्य राशि अक्सर भारतीय सूर्य राशि से एक राशि आगे होती है।
एक से अधिक अयनांश क्यों?
इस खिसकाव पर सब सहमत हैं; मतभेद इस पर है कि दोनों राशिचक्र किस वर्ष एक साथ थे। हर मत से थोड़ा अलग अयनांश बनता है। AstroRealm दक्षिण भारत में सबसे अधिक प्रचलित दो अयनांश देता है:
- लाहिड़ी (चित्रापक्ष) — भारत सरकार की कैलेंडर सुधार समिति (1955) द्वारा अनुशंसित, और अधिकतर पंचांगों व कुंडली सॉफ़्टवेयर में प्रयुक्त।
- कृष्णमूर्ति (KP) — कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) में प्रयुक्त। यह लाहिड़ी से लगभग 6 कला कम है।
क्या चुनाव से फ़र्क पड़ता है?
अधिकतर लोगों के लिए नहीं: 6 कला का अंतर राशि, नक्षत्र या लग्न को शायद ही बदलता है। फ़र्क तब पड़ता है जब चंद्रमा या लग्न किसी सीमा के बहुत पास हो, और KP ज्योतिष में बहुत पड़ता है, जहाँ उप-स्वामी एक अंश के छोटे-से हिस्से में बदल जाते हैं। अगर कुंडली किसी ज्योतिषी को दिखानी है, तो वही अयनांश चुनें जो वे इस्तेमाल करते हैं। AstroRealm के हर प्रिंट पर लिखा होता है कि कौन-सा अयनांश और उसका सटीक मान इस्तेमाल हुआ।
यह केवल मार्गदर्शन के लिए है। निर्णय लेने से पहले ज्योतिषी से सलाह लें।